नोएडा/बिजली विभाग अब व्यवस्था नहीं, दलाली तंत्र बनता जा रहा है। ताजा मामला अवर अभियंता सचिन वर्मा का है, जिन पर आरोप है कि उन्होंने 25 केवीए ट्रांसफार्मर और पोल को बिना किसी विभागीय अनुमोदन, बिना एस्टीमेट और कथित रूप से मोटी रकम लेकर शिफ्ट करा दिया। यह सीधा-सीधा नियमों की हत्या और विभागीय प्रणाली पर करारा तमाचा है। आपको बता दे की
प्राथमिक विद्यालय गुलावली, सेक्टर–168 के पास हुआ यह खेल सवाल नहीं, बल्कि सबूतों के साथ आरोप है। ट्रांसफार्मर शिफ्टिंग जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में जहां सुरक्षा, तकनीकी मानक और प्रशासनिक स्वीकृति अनिवार्य है, वहां अवर अभियंता ने सब कुछ दरकिनार कर दिया—मानो विभाग नहीं, उनकी निजी दुकान हो।
जानकारी मिली है कि सचिन वर्मा पिछले छह वर्षों से नोएडा में जमे हुए हैं। इतना ही नहीं, उनका दावा है कि “उनका कोई कुछ नहीं कर सकता,” क्योंकि ऊपर बैठे कुछ बड़े अफसरों का खुला संरक्षण उन्हें प्राप्त है। यही संरक्षण उन्हें 11 केवी/एलटी एक्सप्रेसवे क्षेत्र में चार पावर हाउस—सेक्टर 168, 153, 142 और 150—पर मनमानी की खुली छूट देता है। ताजा मामला सेक्टर 168 पावर हाउस का बताया जा रहा है। सबसे शर्मनाक तथ्य यह है कि चेयरमैन का ड्रीम प्रोजेक्ट ‘रिस्ट्रक्चरिंग’ ऐसे अभियंताओं के हाथों कागजी मज़ाक बनता जा रहा है। जहां रिस्ट्रक्चरिंग का उद्देश्य पारदर्शिता और जवाबदेही था, वहीं यहां इसे भ्रष्टाचार की ढाल बनाकर इस्तेमाल किया जा रहा है। आपको बता दे कि इस बड़े भ्रष्टाचार खेल का उजागर होने के बाद विभाग के जिम्मेदार अधिकारी भी सवालों के घेरे में है। सवाल यह है कि उनके नाक के नीचे इतने बड़े भ्रष्टाचार का खेल नोएडा में किया जा रहा है तो क्या उनको इस बात की खबर नहीं थी। इस पूरी खबर को लेकर अंकुर निर्भीक दर्पण समाचार ने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत की उन्होंने कहा है कि इस मामले पर टीम बनाई गई है और कार्रवाई की जाएगी। लेकिन क्या अवर अभियंता सचिन वर्मा यह सब कुछ अकेले कर रहे थे या फिर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का संरक्षण उन्हें प्राप्त था। जल्द ही इस खेल में जुड़े अन्य लोगों के नाम का पर्दाफाश किया जाएगा।
