
श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन देवी चित्रलेखा जी के प्रवचन को सुनने के लिए भारी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। कथा की शुरुआत भगवान की आरती के साथ हुई, जिसके बाद देवी जी ने धर्म, भक्ति और मानव जीवन के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने अपने प्रवचन में कहा कि आज धर्म ऐसे संकट में है कि इंसान भगवान को भी बांटने में लगा है। कथा का उद्देश्य केवल जीवन परिवर्तन नहीं, बल्कि प्रभु के आनंद को जीना है। उन्होंने श्रद्धालुओं से चिंता छोड़कर हरिनाम में व्यस्त रहने का संदेश दिया।
कथा के दौरान देवी जी ने भगवान के 24 अवतारों का वर्णन करते हुए श्रीमद्भागवत के प्रसंग सुनाए। साथ ही राजा परीक्षित, ऋषि शमीक और श्राप से मुक्ति के उपायों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कथा श्रवण को मुक्ति का सरल मार्ग बताया।
इस दौरान देवी चित्रलेखा जी ने गौ माता की रक्षा और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का संदेश भी दिया। युवाओं और किसानों को प्रेरित करते हुए उन्होंने प्राकृतिक खेती तथा गोबर से बनी खाद के उपयोग पर जोर दिया।