आठवें वेतन आयोग में शामिल करने की मांग
बाराबंकी। जीने की तमन्ना और कुछ कर गुजरने की चाहत किसी उम्र की मोहताज नही होती। 65 से 95 साल के लगभग एक सैकड़ों वरिष्ठ नागरिकों ने अपने हक पाने की चाहत को लेकर धुधुलकी शाम में कैण्डिल रोशनी लेकर डेढ़ किमी पैदल यात्रा ‘‘कैण्डिल मार्च’’ निकालकर यह साबित कर दिया है कि सरकार वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के अधिकारों से वंचित करती है तो वरिष्ठ नागरिक भी सरकार के खिलाफ आवज बुलन्द कर सकते हैं।
सेवानिवृत्त कर्मचारी एवं पेंशनर एसोसियेशन बाराबंकी द्वारा शनिवार की शाम लखपेड़ाबाग चैराहा स्थित अपने कार्यालय से जिलाधिकारी कार्यालय तक कैडिल मार्च निकाला गया। इस कैण्डिल मार्च में ऐसे भी वरिष्ठ नागरिक जिनकी अवस्था 90 साल से अधिक और अस्वस्थता के कारण ह्वील चेयर पर चलकर कैण्डिल मार्च में भाग लिया, उनके जज्बात यह बता तहा है कि वे भी अपने अधिकारों की चिंता कर रहे हैं। एसोसियेशन के अध्यक्ष बाबूलाल वर्मा ने जिलाधिकारी को सौपे गये ज्ञापन में कहा गया है कि केन्द्रीय आठवें वेतन आयोग के गठन विषयक भारत सरकार के वित्त मंत्रालय (व्यय विभाग) के संकल्प पत्र दि0 03.11.2025 को देखते ही देश भर के पेंशनरों में निराशा एवं क्षोभ व्याप्त हो गया है। इसका मुख्य कारण पूर्व में अभी तक गठित केन्द्रीय वेतन आयोगों के विषय बिन्दु में पेंशनरों की पेंशन एवं अन्य लाभों का संदर्भ शामिल रहता रहा है, परन्तु मौजूदा आठवें वेतन आयोग के संकल्प पत्र में इस विषय को छोड़ दिया गया है। पूर्व अनुभव बताते हैं कि वेतन आयोगों के गठन के इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है कि वेतन आयोग की अनुसंशाओं को लागू करने की तिथि के पूर्व सेवानिवृत्त कर्मचारियों के पेंशन पुनरीक्षण को वेतन आयोग के दायरे से बाहर कर दिया गया है। मोदी सरकार के कार्यकाल प्रारम्भ होने के कुछ ही समय पहले गठित सातवें वेतन आयोग के संकल्प पत्र दिनांक 28.02.2014 के पैरा (च) में स्पष्ट रुप से पेंशन के पुनरीक्षण एवं अन्य लाभों को वेतन आयोग के दायरे में लाया गया है, जिसमें “उन सिद्धान्तों की जांच करना जिनसे पेंशन एवं अन्य सेवा नैवृत्तिक लाभों की संरचना शासित होनी चाहिये और इसमें इस तथ्य को ध्यान में रखते हुये कि 01.01.2004 को अथवा उसके बाद नियुक्त केन्द्र सरकार के सभी कर्मचारियों के सेवा नैवृत्तिक लाभ नई पेशन योजना के दायरे में आते हैं. उन कर्मचारियों की पेंशन में संशोधन भी शामिल है. जो इन सिफारिशों के प्रभावी होने की तारीख से पहले सेवानिवृत्त हो जायेंगे।“
वर्तमान में आठवें वेतन आयोग के संकल्प 03.11.2025 में आयोग की रिपोर्ट लागू होने की तिथि के पहले के पेंशनरों के पेंशन पुनरीक्षण एवं अन्य लाभों को दिये जाने के विषय को छोड़ दिया गया है। इससे स्पष्ट है कि कर्मचारियों के वेतन भत्ते के पुनरीक्षण के साथ पेंशनरों की पेंशन का पुनरीक्षण नहीं होगा। आगे चलकर मंहगाई राहत पर भी खतरा उत्पन्न हो जायेगा, जो पेंशन पुनरीक्षित होने की नीति एवं परम्परा के बिल्कुल विपरीत है।
आठवें वेतन आयोग में राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली में न आने वाले कर्मचारियों की मृत्यु-सह-सेवानिवृत्त ग्रेच्युटी और पेंशन की समीक्षा पैराग्राफ (च) को ध्यान में रखते हुये उन पर सिफारिश करना संकल्प पत्र दि0 03.11.2025 में उल्लिखित किया गया है।
“प्रस्तर 2 (च)3 में गैर अंशदायी पेंशन योजनाओं की गैर वित्त पोषित लागत पर विचार करने की बात उल्लिखित है। वैसे तो केन्द्र और राज्य सरकार की अनेक गैर अंशदायी पेंशन योजनायें चल रही हैं, किन्तु कर्मचारियों के लिए केवल एक पेंशन योजना ’परिभाषित लाभ पेंशन योजना चल रही है, जिसमें दिनांक 01.01.2004 के पहले के केन्द्रीय कर्मचारीगण सम्मिलित हैं। इस पेंशन योजना को गैर अंशदायी कहा जा रहा है, जो बिल्कुल ही अनुचित है, क्योंकि माननीय उच्चतम न्यायालय के पूर्ण पीठ जो मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित हुई थी, ने दिनांक 17.12.1982 को अपने निर्णय में स्पष्ट रुप से कहा है कि कर्मचारियों को जो पेंशन दी जाती है वह कोई सरकार का दान अथवा कृपा नहीं है। अपितु वह कर्मचारी की लम्बी सेवाओं का प्रतिफल है और माननीय न्यायालय ने उसे लंबित वेतन माना है। कैण्डिल मार्च निकालकर वरिष्ठ नागरिकों ने मांग की है कि आठवें वेतन आयोग की रिपोर्ट लागू होने की तिथि के पूर्व के पेंशनरों एवं पारिवारिक पेंशनरों की पेंशन पुनरीक्षण एवं अन्य लाभों से सम्बन्धित मामला पूर्व वेतन आयोगों की भांति आठवें वेतन आयोग को भी तत्काल संदर्भित किया जाये तथा पुराने पेंशनरों की पेंशन एवं पारिवारिक पेंशन का पुनरीक्षण तथा अन्य लाभों से सम्बन्धित प्रकरण आठवें वेतन आयोग को भेजे गये टम्र्स आफ रिफरेंस दि० 03.11.2025 को संशोधित कराने का कष्ट करें।कैडिल मार्च में प्रमुख रूप से सेवानिवृत कर्मचारी एवं पेंशनर एसोसिएशन के अध्यक्ष बाबूलाल वर्मा, महामंत्री अशोक कुमार सोनी, पूर्व न्यायाधीश रामचंद्र निगम, पूर्व सीएमएस डॉ एससी सोनकर, सुशीला बाजपेई, मुन्नी सिंह, सुशीला अंसारी, सुरेन्द्र कुमार वर्मा, राजेश गुप्ता, राम यज्ञ सरोज आदि एक सैकड़ों लोग कैंडल मार्च में भाग लिया।
ब्यूरो बाराबंकी
