
देवी चित्रलेखाजी की श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं को भक्ति, कर्म और मोक्ष का गूढ़ संदेश दिया गया। कथा के दौरान देवी चित्रलेखा ने कहा कि सच्चे सतगुरु की कृपा से ही जीवन में परमात्मा का आगमन होता है और मनुष्य को सही मार्ग प्राप्त होता है।
उन्होंने बताया कि जब किसी के जीवन में सतगुरु मिल जाते हैं तो यह समझ लेना चाहिए कि अब ईश्वर की कृपा होने वाली है। सतगुरु के बिना जीवन अधूरा है और उनकी शरण में जाने से ही व्यक्ति को सच्चा मार्ग मिलता है।
कथा में जीव और माया के संबंध को समझाते हुए कहा गया कि जीव जन्म से ही माया में लिपट जाता है, जिसके कारण वह अपने कल्याण का मार्ग भूल जाता है और कर्मों के अनुसार उसे फल भोगना पड़ता है।
इस दौरान अजामिल प्रसंग सुनाते हुए बताया गया कि जीवन भर पाप करने के बावजूद अंत समय में भगवान नारायण का नाम लेने से उसका उद्धार हो गया।
इससे यह संदेश दिया गया कि मनुष्य को जीवन में भगवान के नाम के प्रति सच्ची श्रद्धा रखनी चाहिए।
इसके साथ ही गुरु और शिष्य के संबंध पर प्रकाश डालते हुए कहा गया कि सच्चे गुरु की शरण में रहकर भक्ति करने से ही भगवान की प्राप्ति संभव है। कथा में प्रह्लाद प्रसंग का भी वर्णन किया गया, जिसमें उनकी अटूट भक्ति और भगवान के प्रति विश्वास को दर्शाया गया।
कथा के अंत में हरिनाम संकीर्तन के महत्व पर जोर देते हुए श्रद्धालुओं से नियमित रूप से भगवान का स्मरण करने की अपील की गई।
बताया गया कि आगामी दिनों में भगवान के विभिन्न अवतारों और विशेष रूप से वामन अवतार की कथा का विस्तार से वर्णन किया जाएगा, साथ ही कृष्ण जन्मोत्सव भी धूमधाम से मनाया जाएगा।