ग्रेटर नोएडा। विश्व हिंदू परिषद एवं बजरंग दल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “अखंड भारत संकल्प दिवस” कार्यक्रम कॉन्लेज पार्क के इनोवेटिव ग्रुप ऑफ कॉलेज में राष्ट्र-एकता, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और पीढ़ियों से चले आ रहे संघर्ष-संकल्प को आगे बढ़ाने का आह्वान से संपन्न किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीमान राजेश चौधरी (कार्यक्रम अध्यक्ष) ने की। मुख्य वक्ता गौरव प्रताप (प्रांत साप्ताहिक मिलन प्रमुख एवं विभाग संगठन मंत्री—संभल) रहे। मंचासीन अतिथियों में ललित (विभाग मंत्री—नोएडा), सुमित (विभाग संयोजक—बजरंग दल) एवं विनय (जिला अध्यक्ष) शामिल रहे। मंच-संचालन फतह नगर (जिला संयोजक, बजरंग दल) ने किया। प्रांत कार्यकारिणी से अवधेश, विवेक त्रिपाठी एवं सतेंद्र राघव की गरिमामयी उपस्थिति रही।
मुख्य वक्ता गौरव प्रताप ने कहा कि “भारत केवल एक राष्ट्र नहीं, बल्कि एक अखंड भू-खंड का सांस्कृतिक स्वरूप है, जिसका वर्णन विश्व-इतिहास और परंपराओं में मिलता है। यह वही पावन धरती है जहाँ भगवान ने स्वयं अवतार लिए, देवों ने रक्षा की, और हर युग में धर्म हेतु संघर्ष हुए।” उन्होंने स्मरण कराया कि द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने धर्म-स्थापना के लिए अपने ही संकल्पों को तोड़ते हुए कर्तव्य का मार्ग अपनाया—यह संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है।
उन्होंने कहा, “दुर्भाग्य है कि हम कभी-कभी एक-एक इंच भूमि के लिए आपस में उलझ पड़ते हैं और अपने उन पूर्वजों की शहादत भूल जाते हैं जिन्होंने इसी मिट्टी के लिए प्राण न्योछावर किए।” हाल ही में मनाई गई कृष्ण जन्माष्टमी पर देश भर में दही-हांडी, माखन-मिश्री भोग और विविध आयोजनों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “उत्सव के साथ हमें कृष्ण के चरित्र और उनके धर्म-रक्षा के संदेश को भी आत्मसात करना चाहिए—महाभारत में रखे उनके सिद्धांत आज भी हमारे पथ-प्रदर्शक हैं।”
वक्ताओं ने कहा कि भारत को “जंबू द्वीपे, भारत खंडे” जैसे वंदनीय उच्चारणों से प्रेरित किया गया है; आज आवश्यकता है कि हम इनके असली महत्व को जन-जन तक पहुँचाएँ। यह धर्म और ज्ञान की भूमि है—भोग-विलास की नहीं। “हम सबके पूर्व पुण्य के कारण हमें भारत जैसे पावन भू-भाग में जन्म मिला है; भगवान ने स्वयं चिन्हित किया कि हमें इसी भूखंड में जन्म लेकर धर्म और राष्ट्र-निर्माण का कार्य करना है,” वक्ताओं ने कहा।
कार्यक्रम में पीढ़ी-दर-पीढ़ी चल रहे संघर्ष और साधना को निरंतर रखने का संकल्प लिया गया। श्रीकृष्ण के उपदेश—“जब-जब धर्म ग्लानि होगी, तब-तब मैं अवतार लूँगा”—का संदर्भ देते हुए उपस्थित युवाओं से अन्याय, शोषण और सामाजिक विभाजन के विरुद्ध सजग रहने का आग्रह किया गया। समाज में उठ रहे “लव जिहाद” एवं धर्मांतरण जैसे मुद्दों को लेकर वक्ताओं ने जागरूकता, विधि-सम्मत कार्रवाई और सामाजिक एकजुटता पर बल दिया, और कहा कि किसी भी प्रकार की गतिविधि जो समाज को तोड़ती हो, उसका लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक ढंग से प्रतिरोध आवश्यक है। साथ ही, प्रत्येक व्यक्ति से यह आत्ममंथन करने का आह्वान किया गया कि “क्या हम भगवान श्रीराम के कार्य के सहायक बन रहे हैं—धर्म, करुणा और सत्य के पथ पर?”
युवाओं से अपील की गई कि वे अखंड भारत की भावना को व्यवहार में उतारें—ज्ञान, विज्ञान और मूल सिद्धांतों के संग—ताकि भारत पुनः विश्वगुरु के रूप में प्रतिष्ठित हो। वक्ताओं ने कहा, “हम सब आज संकल्प लें कि जैसे हमारे पूर्वजों ने पाँच शताब्दी तक अटल रहकर अयोध्या में श्रीराम मंदिर का संकल्प पूरा किया, वैसे ही हम भी धैर्य, अनुशासन और लोकतांत्रिक मर्यादा के साथ भारत की अखंडता और सांस्कृतिक एकता के लिए कार्य करेंगे—चाहे एक, दो या तीन पीढ़ियाँ क्यों न लगें।”
अंत में, कार्यक्रम अध्यक्ष राजेश चौधरी ने सभी उपस्थित जनों, कार्यकर्ताओं और विशेषकर युवा शक्ति का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “हमारी चिंता केवल निजी भविष्य की नहीं, बल्कि राष्ट्र के भू-खंड और गौरव की भी होनी चाहिए। यही भाव हमें एक परिवार, एक समाज और एक भारत के रूप में जोड़ता है।”