नोएडा। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा उत्तराखंड के प्रवासी नागरिकों को कथित रूप से घुसपैठिया बताए जाने संबंधी बयान को लेकर उत्तराखंड समाज के लोगों में नाराजगी देखने को मिली। इस मामले में नोएडा में समस्त उत्तराखंड समाज की ओर से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम ज्ञापन सौंपकर मामले की जांच कराने और उचित कार्रवाई की मांग की गई।
कार्यक्रम के संयोजक गिरीश कोटनाला (एसपी चमोली) ने कहा कि उत्तराखंड के लोग देश के विभिन्न राज्यों में मेहनत, ईमानदारी, अनुशासन और राष्ट्रसेवा के लिए पहचाने जाते हैं। सेना से लेकर उद्योग, व्यापार, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में उत्तराखंड के लोगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। ऐसे में प्रवासी उत्तराखंडियों के लिए घुसपैठिया जैसे शब्दों का इस्तेमाल उनके सम्मान और स्वाभिमान को ठेस पहुंचाने वाला है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड ने उत्तर प्रदेश को चार प्रमुख मुख्यमंत्री दिए हैं। इसके अलावा तीन सीडीएस सहित कई सेना प्रमुख और देश की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अधिकारी दिए हैं। ऐसे में उत्तराखंड के लोगों को लेकर इस तरह की टिप्पणी उन सभी के योगदान और सम्मान का भी अपमान है, जिन्होंने देश और प्रदेश की सेवा की है। ज्ञापन के माध्यम से मुख्यमंत्री से कथित बयान की तथ्यों के आधार पर जांच कराने, उत्तराखंड के प्रवासी नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों एवं सम्मान की रक्षा करने तथा समाज में वैमनस्य फैलाने वाले संवाद को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की गई।
इस अवसर पर गिरीश कोटनाला ने कहा कि उत्तराखंड के प्रवासी नागरिक घुसपैठिए नहीं, बल्कि देश के विकास और सुरक्षा में योगदान देने वाले जिम्मेदार नागरिक हैं। कार्यक्रम में पुष्पा रावत, सुरेंद्र बिष्ट, बीएस नेगी, श्याम प्रसाद सुंदरियाल, पूरन चंद पंचोली, पुष्पा भट्ट, शंभू प्रसाद कोटनाला, वीपी रतूड़ी, गोपाल बैगासी, प्रयाग दत्त, विशाल मनी नाडियाल, जीवानंद ध्यानी, सुनीता नयाल, लक्ष्मी पटवाल, लता रावत, रेखा, कृष्ण कुमार सुंदरियाल, सुदर्शन चौधरी, निमिषा नेगी, योगेश जुयाल, गोपाल चौहान और सत्यनारायण महावर सहित समाज के अनेक लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने एक स्वर में कहा कि उत्तराखंड के प्रवासी नागरिकों का सम्मान और स्वाभिमान सर्वोपरि है।