नोएडा सड़क किनारे बेसहारा हालत में पड़े वो चेहरे, जिनके पास न छत थी, न सहारा—अब उन्हें एक नया जीवन मिला है। इस कार्य के पीछे है सेवा की भावना, करुणा का जज़्बा और समर्पण की मिसाल।अखिल भारतीय गुरुकुल एवं गौशाला अनुसंधान संस्थान की जिला अध्यक्ष किरण त्यागी और रेनू बाला के नेतृत्व में पिछले दो महीनों के दौरान चार बेसहारा बुजुर्गों को “अपना घर आश्रम” में नया जीवन मिला है। ये वे बुजुर्ग हैं जो कभी सेक्टर-93 की रेडलाइट, कभी सेक्टर-137 मेट्रो स्टेशन की पार्किंग या फिर सेक्टर-143 मेट्रो के नीचे बीमार, भूखे और अकेले पड़े पाए गए थे। समाज ने भले उन्हें नज़रअंदाज़ कर दिया हो,

लेकिन इंसानियत ने उन्हें अपनाया। इस अभियान में सुरजीत खारी, उमा मिश्रा, उपनिरीक्षक राधे सक्सेना, उपनिरीक्षक आरती शर्मा और अपना घर आश्रम की गायत्री सहित कई लोगों ने मिलकर सक्रिय भूमिका निभाई। सभी की सामूहिक कोशिशों से इन ज़िंदगियों में फिर से मुस्कान लौटी। इस कार्य में पुलिस प्रशासन और अस्पताल कर्मियों ने भी सराहनीय सहयोग दिया।राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरु गौतम ऋषि, जिला महासचिव गौतम अधिकारी और युवा समाजसेवी विपिन चौधरी (मंडल उपाध्यक्ष, भाजपा) द्वारा अभियान की निगरानी और मार्गदर्शन किया गया। “जब कोई नहीं होता, तब ‘अपना घर’ होता है।”यह सोच आज ज़मीन पर उतर रही है और मानवता के सबसे उज्ज्वल रूप को जीवंत कर रही है।