नोएडा। उद्यान विभाग की मेहनत और सुव्यवस्थित वृक्षारोपण से बदली इलाके की तस्वीर
नोएडा। शहर के सेक्टर 105 ने हरियाली, स्वच्छता और सुनियोजित विकास के मामले में एक नई मिसाल कायम की है। ग्रीन बेल्ट, सड़कों के किनारे और पार्कों में व्यवस्थित वृक्षारोपण तथा पेड़ों की नियमित देखभाल ने इस सेक्टर को एक आदर्श और आकर्षक आवासीय क्षेत्र में बदल दिया है। आज यहां की हरियाली न केवल स्थानीय निवासियों को सुकून दे रही है, बल्कि आसपास के क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा का केंद्र बनती जा रही है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, बीते कुछ वर्षों में सेक्टर 105 की तस्वीर तेजी से बदली है। जहां पहले खाली स्थान और बिखरी हरियाली नजर आती थी, वहीं अब सड़कों के दोनों ओर सजे पौधे, व्यवस्थित ग्रीन बेल्ट और साफ-सुथरे पार्क इस क्षेत्र की पहचान बन चुके हैं। सुबह-शाम टहलने वाले लोग इस बदलाव को खुलकर सराह रहे हैं।
इस परिवर्तन के पीछे Noida Authority के हॉर्टिकल्चर (उद्यान) विभाग की अहम भूमिका रही है। विभाग द्वारा नियमित सिंचाई, पौधों की छंटाई, नई पौधारोपण योजनाएं और समय-समय पर रखरखाव ने हरियाली को बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। तेज गर्मी और बदलते मौसम के बावजूद पेड़ों और पौधों की देखभाल में किसी प्रकार की कमी नहीं आने दी जा रही है।
विशेष रूप से उद्यान विभाग के डायरेक्टर Anand Mohan Singh के नेतृत्व में किए जा रहे प्रयासों की स्थानीय निवासी खुलकर सराहना कर रहे हैं। उनके निर्देशन में विभाग की टीम ने सेक्टर 105 को हरियाली से भरपूर बनाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम किया है, जिसका परिणाम आज साफ दिखाई दे रहा है।
सेक्टर 105 आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय (दीपक शर्मा) ने कहा कि “ग्रीन बेल्ट, सड़कों और पार्कों में जिस तरह से पेड़ों की देखभाल की जा रही है, उससे पूरा क्षेत्र एक आदर्श आवासीय इलाके के रूप में विकसित हुआ है। इसके लिए हम उद्यान विभाग और विशेष रूप से डायरेक्टर आनंद मोहन सिंह का हृदय से धन्यवाद और आभार व्यक्त करते हैं।”
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी क्षेत्रों में इस तरह की हरियाली न केवल प्रदूषण को कम करती है, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य और जीवन स्तर को भी बेहतर बनाती है। सेक्टर 105 का यह मॉडल शहर के अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण बन सकता है।
कुल मिलाकर, सेक्टर 105 की हरियाली यह साबित करती है कि यदि योजनाबद्ध तरीके से प्रयास किए जाएं, तो शहरी जीवन में भी प्रकृति के साथ संतुलन स्थापित किया जा सकता है।
